मोहंती ने कराया मनोज का पुनर्वास
  




-एक पुराने 'कर्ज" की अदायगी
भोपाल,दोपहर मेट्रो। अपर मुख्यसचिव स्तर के अध्ािकारी मनोज श्रीवास्तव का ग्यारह महीने के 'भटकाव"के बाद पुनर्वास प्रशासनिक गलियारों में उत्सुकता का सबब बन गया है। भाजपा शासन से जुड़ी कुछ खास और कुछ तथ्य-कथ्य वजहों के चलते कांग्रेस की कमलनाथ सरकार ने सत्ता संभालने के बाद उन्हें मुख्यध्ाारा से निर्वासित कर दिया था। अब पंचायत व ग्रामीण विकास जैसे भारी भरकम महकमे का काम 'फिलहाल" उन्हें सौंपा जाना संकेत दे रहा है कि सरकार के भीतर उनके प्रति नाराजगी का भाव कम हो रहा है।
कल शाम श्रीवास्तव को पंचायत ग्रामीण विकास का काम देने का आदेश जारी होने के पहले मुख्यसचिव सुध्ािरंजन मोहंती ने मुख्यमंत्री कमलनाथ से चर्चा की थी। नाथ इस महकमे का काम देख रहीं गौरी सिंह से सख्त नाराज थे क्योंकि उन्होंने सरकार के संज्ञान में लाए बिना ही पंचायतो में आरक्षण के आदेश जारी कर दिये थे,जब आदेश जिलो ंतक पहुंचे तो इस पर आश्चर्य जताया जाने लगा।उधर गौरी सिंह को मुख्यमंत्री व विभागीय मंत्री की नाराजगी का अहसास हुआ तो आदेश वापस लेने की प्रक्रिया शुरू हुई। नाथ ने मुरैना रवाना होने से पहले मोहंती को निर्देश दे दिये थे कि गौरी सिंह को बदला जाए।इसी दौरान श्रीवास्तव का नाम आया।माना जाता है कि मोहंती ने श्रीवास्तव का पैरोकार बनकर अपने प्रमोशन का कर्ज चुका दिया है,भाजपा शासन के दौरान जब मोहंती प्रशासनिक रूप से खुद को स्थापित करने की जद्दोजहद कर रहे थे और उनकी प्रमुख सचिव के पद पर पदोन्नाति तक बाध्ाित हो रही थी,तब मुख्यमंत्री सचिवालय में तैनात श्रीवास्तव ने उनकी राह आसान की थी, यदि मोहंती उसी उलझन में फंसे रहते तो शायद वे और पिछड़ जाते तथा सीएस की राह और दूर हो जाती।हालांकि दोनों अफसरों को बीच भाजपा शासन के वक्त खटास भी साफ देखी जाती थी।